आमतौर पर यही सुनने को मिलता है कि मांगलिक होना शुभ नहीं है। कम से कम लड़कियों के मामले में जरूर यही कहा जाता है। बहुत से तथाकथित ज्ञानी (जोकि वास्तव में ज्ञानी नहीं हैं, कम से कम मेरी नजर में) ज्योतिषों ने यह दुष्प्रचार कर रखा है कि मांगलिक होना खराब है। मगर, क्या आप जानते हैं कि मांगलिक होने से होता क्या है? मंगल ग्रह करता क्या है? जातक मांगलिक कैसे होता है? दरअसल, यह एक तर्कसंगत ग्रह है, जो कि लग्न, चौथे भाव, सातवें भाव, आठवें भाव और बारहवें भाव में मंगल ग्रह होने पर जातक मांगलिक होता है। इसकी शुक्र के साथ युति होने से व्यक्ति गतिणतज्ञ बनता है। कड़े निर्णय लेता है। मांगलिक व्यक्ति प्रेम भी करेगा तो तर्क के साथ। उसके प्रेम में दो और दो चार होगें, चाहें परिस्थितियां कैसी भी हों। अन्य प्रेमी परिस्थितियों के अधीन दो और दो का जोड़ तीन या पांच भी कर सकते हैं।
मंगल ग्रह यदि आठवें या बारहवें भाव में हो तो ऐसा होना खराब होता है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में या शुभ ग्रहों की युति से कुछ अच्छे परिणाम भी दे सकता है। लग्न में मंगल जातक के व्यक्तित्व को बहुत तीक्ष्ण बना देता है। वहीं, चौथे भाव में मंगल जातक को कड़ी पारिवारिक पृष्ठभूमि देता है। सातवें स्थान का मंगल जातक को साथी या सहयोगी के प्रति कठोर बनाता है। आठवें और बारहवें स्थान का मंगल आयु और शारीरिक क्षमताओं को प्रभावित करता है। इन स्थानों पर बैठा मंगल यदि अच्छे प्रभाव में है तो जातक के व्यवहार में मंगल के अच्छे गुण आएंगे और खराब प्रभाव होने पर खराब गुण आएंगे। जैसे मंगल की शुभ ग्रहों के साथ युति जातक को सेना, पुलिस आदि में उच्च पदों पर ले जाती है। वहीं अशुभ ग्रहों की स्थिति चोर, डाकू या आतंकवादी बना सकती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि उच्चपदस्य सैन्य अधिकारी और कुख्यात आतंकवादी दोनों की कुंडली में मंगल ग्रह का जबरदस्त प्रभाव होगा।


मांगलिक व्यक्ति कठोर निर्णय लेने वाला, कठोर वचन बोलने वाला, लगातार काम करने वाला, विपरीत लिंग के प्रति कम आकर्षित होने वाला, योजनाबद्ध काम करने वाला, कठोर अनुशासन वाला, नए अनजाने कामों को शीघ्रता से हाथ में लेने वाला और लड़ाई को तत्पर रहता है। इसके चलते गैर मांगलिक जातक इनके साथ अधिक समय तक नहीं रह पाते।
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